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सागर में करोड़ों के डिजिटल VMS बने कबाड़, 4 साल से बंद, विभाग कर रहा नए सिरे से तैयारी

रिपोर्ट: Admin Desk
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सागर में करोड़ों के डिजिटल VMS बने कबाड़, 4 साल से बंद, विभाग कर रहा नए सिरे से तैयारी

सागर में करोड़ों के डिजिटल VMS बने कबाड़, 4 साल से बंद, विभाग कर रहा नए सिरे से तैयारी

कटरा, कलेक्ट्रेट, सिविल लाइन समेत 10 जगहों पर लगे बोर्ड, लगने के कुछ महीनों में ही हो गए ठप

सागर। स्मार्ट सिटी और डिजिटल सूचना व्यवस्था के नाम पर सागर शहर में लगाए गए डिजिटल VMS (Variable Message Sign) अब बदहाली की कहानी बयां कर रहे हैं। करीब 4 साल पहले करोड़ों रुपये खर्च कर शहर के 10 प्रमुख स्थानों पर लगाए गए ये हाईटेक डिस्प्ले बोर्ड आज पूरी तरह बंद पड़े हैं और किसी भी जनहित कार्य में उपयोग नहीं हो रहे।

शहर के कटरा, कलेक्ट्रेट के पास, सिविल लाइन सहित अन्य प्रमुख लोकेशन पर लगाए गए ये डिजिटल बोर्ड शुरुआत में चलचित्र के माध्यम से जागरूकता संदेश प्रसारित कर रहे थे। ट्रैफिक अपडेट, सरकारी योजनाओं की जानकारी और अन्य जनहित संदेश इन पर दिखाए जाते थे। लेकिन चालू होने के कुछ ही महीनों बाद ये सभी VMS अचानक बंद हो गए और फिर दोबारा शुरू नहीं हो पाए।

वर्तमान में हालात यह हैं कि शहर के करीब 10 स्थानों पर लगे VMS पूरी तरह निष्क्रिय हैं। सवाल यह उठता है कि यदि इनमें तकनीकी खराबी आई थी, तो ठेकेदार कंपनी के खिलाफ अब तक क्या जांच और रिकरवी हुई इस मामले में कोई स्पष्ट जानकारी सामने नही आई है।

चौंकाने वाली बात यह भी है कि इतने बड़े प्रोजेक्ट के फेल होने के बावजूद न तो दोबारा टेंडर जारी किया गया और न ही संबंधित दिल्ली की ओरियन एजेंसी पर किसी तरह की पेनल्टी लगाई गई। इससे पूरे मामले पर संदेह गहराता जा रहा है कि कहीं यह प्रोजेक्ट केवल दिखावे के लिए तो नहीं किया गया, मिली जानकारी के अनुसार ठेकेदार एजेसी ओरियन अपना 90% भुकतान लेकर पहले ही जा चुकी हैं जिस कारण इन बोर्डो का रखरखाव नहीं हो पाया, जबकि भुकतान कैसे हुआ इसकी जांच का भी पता नहीं लगा !

इनका कहना हैं

पूर्व से लगे यह VMS मैंने आते ही इनपर संज्ञान लिया था ठेकेदार एजेंसी पर कार्य न करने के चलते उसे टर्मनेट किया गया हैं इसपर नए सिरे से काम चालू कराया जा रहा हैं जल्द ही बोर्ड चालू होंगे- स्मार्ट सिटी सीईओ राजकुमार खत्री

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ये VMS चालू रहते, तो शहर में ट्रैफिक प्रबंधन, आपातकालीन सूचना और बड़े आयोजनों के दौरान लाइव अपडेट देने,मौषम अपडेट आदि में काफी मदद मिलती। यहां तक कि बड़े आयोजनों के समय क्रिकेट मैच या अन्य सार्वजनिक प्रसारण भी किए जा सकते थे।

फिलहाल करोड़ों की लागत से तैयार यह परियोजना अब केवल शोपीस बनकर रह गई है और जनता का पैसा बर्बाद होता नजर आ रहा है। जरूरत इस बात की है कि प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए, दोषियों पर कार्रवाई करे और इस डिजिटल सिस्टम को फिर से चालू कराने की दिशा में ठोस कदम उठाए।

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Admin Desk

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